सबादा में खुली बैठक: ग्रामीणों ने अधिकारियों के सामने उठाईं कब्रिस्तान, खेल मैदान और विकास की समस्याएं
बांदा। सबादा में गुरुवार को आयोजित सबादा में खुली बैठक में करीब दो सैकड़ा ग्रामीणों ने हिस्सा लिया। बैठक में गांव के विकास, आरक्षण, जमीन, कब्रिस्तान, खेल मैदान, होली एवं श्मशान भूमि सहित विभिन्न स्थानीय समस्याओं और जरूरतों को लेकर ग्रामीणों ने अधिकारियों के सामने अपनी बात रखी। बैठक में हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के ग्रामीणों की मौजूदगी रही और लोगों ने गांव के विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा में भाग लिया।
सबादा में खुली बैठक का उद्देश्य गांव से संबंधित विकास कार्यों, जमीन और सार्वजनिक उपयोग की जगहों से जुड़े विषयों पर ग्रामीणों की राय जानना तथा उनकी समस्याओं को संबंधित अधिकारियों के सामने रखना रहा। बैठक के दौरान ग्रामीणों ने कहा कि गांव के विकास से जुड़े फैसलों में स्थानीय लोगों की जरूरतों और जमीन से जुड़े मामलों को ध्यान में रखा जाना जरूरी है।
कब्रिस्तान की जमीन का मुद्दा उठा
सबादा में खुली बैठक के दौरान कब्रिस्तान की जमीन का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। मंसूर खान ने अधिकारियों के सामने कब्रिस्तान की समस्या रखते हुए कहा कि गांव में कब्रिस्तान के लिए पर्याप्त जगह की आवश्यकता है। उन्होंने कब्रिस्तान के बगल में जमीन उपलब्ध कराने की मांग रखी, ताकि भविष्य में ग्रामीणों को दफनाने के लिए जगह की समस्या का सामना न करना पड़े।

मंसूर खान ने कब्रिस्तान के लिए जमीन की मांग रखी
मंसूर खान ने कहा कि गांव की आबादी और भविष्य की जरूरतों को देखते हुए कब्रिस्तान के लिए उचित स्थान की व्यवस्था पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों के सामने सार्वजनिक उपयोग से जुड़े स्थानों को ग्रामीणों की वास्तविक जरूरतों के अनुसार व्यवस्थित किए जाने की बात रखी।
खेल मैदान के लिए भी उठी आवाज
बैठक में गांव में खेल मैदान की आवश्यकता का मुद्दा भी सामने आया। मंसूर खान ने बच्चों और युवाओं के लिए खेल मैदान उपलब्ध कराने की मांग रखते हुए कहा कि गांव में खेल गतिविधियों के लिए पर्याप्त स्थान होना जरूरी है।
बच्चों और युवाओं के लिए मैदान की मांग
ग्रामीणों का कहना था कि बच्चों और युवाओं को खेलकूद के लिए उचित मैदान मिलने से उन्हें अपनी प्रतिभा विकसित करने का अवसर मिलेगा। ग्रामीणों ने खेल मैदान को गांव की आवश्यक सार्वजनिक सुविधाओं में शामिल किए जाने की मांग रखी।
होली और श्मशान भूमि को लेकर चर्चा
बैठक में सबादा के पूर्व प्रधान दिलशाद खान जी ने भी गांव से जुड़े सार्वजनिक उपयोग की जमीन के विषय पर अपनी बात रखी। उन्होंने होली के आयोजन तथा श्मशान भूमि से संबंधित स्थान और व्यवस्था को लेकर चर्चा की।
ग्रामीणों ने कहा कि गांव में सार्वजनिक उपयोग की जमीनों को सुरक्षित रखना जरूरी है, ताकि आने वाले समय में किसी भी समुदाय या वर्ग को इन स्थानों की कमी के कारण परेशानी न हो। बैठक में अलग-अलग सार्वजनिक जरूरतों के लिए जमीन की उपलब्धता और उसके उचित उपयोग पर चर्चा की गई।
गुरुकुल इंटर कॉलेज के प्रबंधक डॉ. राजू साहू ने भी की चर्चा
सबादा में खुली बैठक में गुरुकुल इंटर कॉलेज के प्रबंधक डॉ. राजू साहू जी ने भी चर्चा में भाग लिया। उन्होंने बैठक में गांव से जुड़े विषयों और विकास से संबंधित मुद्दों पर अपनी बात रखी। बैठक में मौजूद लोगों ने विभिन्न समस्याओं और जरूरतों पर विचार-विमर्श किया।

मौजूदा प्रधान सहरुद्दीन खान ने भी रखी बात
बैठक में मौजूदा प्रधान सहरुद्दीन खान ने भी ग्रामीणों के साथ बातचीत की। उन्होंने गांव से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर अपनी बात रखी और बैठक में मौजूद अधिकारियों तथा ग्रामीणों के सामने समस्याओं पर चर्चा की।
प्रधान ने कहा कि गांव के विकास से जुड़े विषयों पर आपसी बातचीत और प्रशासन के सामने सही तरीके से समस्याएं रखना जरूरी है। बैठक में मौजूद ग्रामीणों ने भी अपनी-अपनी समस्याएं और सुझाव अधिकारियों के सामने रखे।
जमीन की अदला-बदली को लेकर ग्रामीणों की चिंता
सबादा में खुली बैठक के दौरान गांव की जमीन से जुड़े विषय पर भी चर्चा हुई। ग्रामीणों की ओर से यह बात रखी गई कि किसी किसान की जमीन का स्थान अनावश्यक रूप से एक जगह से दूसरी जगह न बदले और जमीन से जुड़े मामलों में किसानों के हितों का ध्यान रखा जाए।
किसानों ने पारदर्शिता और नियमों के पालन की मांग की
ग्रामीणों ने कहा कि गांव की जमीन और किसानों की जमीन उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए जमीन से जुड़े किसी भी निर्णय में पारदर्शिता और नियमों का पालन होना जरूरी है। अधिकारियों से मांग की गई कि जमीन से संबंधित मामलों में ग्रामीणों की आपत्तियों और सुझावों को भी सुना जाए।

विकास कार्यों के लिए जमीन पर अधिकारियों से चर्चा
बैठक में अधिकारियों की ओर से गांव के विकास कार्यों से संबंधित विषयों पर ग्रामीणों से चर्चा की गई। बातचीत के दौरान गांव की करीब 3 प्रतिशत जमीन विकास कार्यों के लिए उपयोग किए जाने से संबंधित विषय भी सामने आया।
ग्रामीणों ने कहा कि यदि विकास कार्यों के लिए जमीन का उपयोग किया जाता है तो उसका उद्देश्य स्पष्ट होना चाहिए और विकास कार्यों का लाभ गांव के लोगों तक पहुंचना चाहिए। सड़क, सार्वजनिक सुविधाएं, खेल मैदान और अन्य जरूरी कार्यों को प्राथमिकता दिए जाने की मांग भी ग्रामीणों की ओर से रखी गई।
सबादा में खुली बैठक में बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद
सबादा में खुली बैठक में गांव के अलग-अलग हिस्सों से करीब दो सैकड़ा ग्रामीण पहुंचे। बैठक में ग्राम प्रधान सहरुद्दीन खान, पूर्व प्रधान दिलशाद खान, मंसूर खान, सैफुद्दीन खान, मुन्नीलाल यादव, मोतीलाल निषाद, श्याम निषाद, रंजीत निषाद, गिरधारी निषाद, रामकिशोर निषाद, वसीउज्जमा खान, अनवर खान, सद्दाम खान बीडीसी सहित दो सैकडा ग्रामीण मौजूद रहे।
बैठक में हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के लोगों ने भाग लिया। ग्रामीणों ने कहा कि गांव की समस्याएं किसी एक व्यक्ति या समुदाय की नहीं हैं, बल्कि विकास और सार्वजनिक सुविधाओं से जुड़े मुद्दे पूरे गांव से संबंधित हैं।
ग्रामीणों ने अधिकारियों के सामने रखे सुझाव
बैठक के दौरान ग्रामीणों और अधिकारियों के बीच कई विषयों पर बातचीत हुई। लोगों ने अपनी समस्याएं बताने के साथ-साथ भविष्य में गांव के विकास के लिए सुझाव भी दिए। सबादा में खुली बैठक में ग्रामीणों की भागीदारी से स्थानीय समस्याओं और सार्वजनिक सुविधाओं से जुड़े कई विषय सामने आए।
ग्रामीणों को आगे की कार्रवाई की उम्मीद
सबादा में खुली बैठक में उठाए गए विभिन्न मुद्दों के बाद ग्रामीणों को उम्मीद है कि जिन समस्याओं और मांगों को अधिकारियों के सामने रखा गया है, उन पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई होगी। कब्रिस्तान के लिए जमीन, खेल मैदान, होली एवं श्मशान भूमि, किसानों की जमीन से जुड़े विषय तथा विकास कार्यों के लिए जमीन जैसे मुद्दे बैठक में चर्चा के प्रमुख विषय रहे।
ग्रामीणों का कहना है कि खुली बैठक का उद्देश्य तभी पूरा होगा जब बैठक में सामने आए मुद्दों पर संबंधित विभागों द्वारा नियमानुसार कार्रवाई की जाए और ग्रामीणों को उसकी जानकारी भी दी जाए।
स्थानीय लोगों की भागीदारी से विकास पर चर्चा
सबादा की इस बैठक में ग्रामीणों ने अपनी समस्याओं को अधिकारियों के सामने रखने के साथ यह भी कहा कि गांव के विकास से जुड़े फैसलों में स्थानीय लोगों की भागीदारी और उनकी बात सुनना महत्वपूर्ण है। बैठक में मौजूद लोगों ने उम्मीद जताई कि प्रशासन और ग्राम पंचायत के स्तर पर उठाए गए मुद्दों पर नियमों के अनुसार समाधान की दिशा में काम आगे बढ़ेगा।
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UP Ki Awaaz की रिपोर्ट — गांव की आवाज, गांव के मुद्दों के साथ।

