विकास के दावों की खुली पोल: सबादा ग्राम सभा में टूटी पुलियाएं, गंदगी से बजबजाती नालियां और बदहाल व्यवस्थाओं ने खड़े किए गंभीर सवाल
सबादा (बांदा)। एक ओर सरकार गांवों के विकास, स्वच्छता और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत बनाने के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर विकास के दावों की खुली पोल खोलती तस्वीरें ग्राम सभा सबादा से सामने आई हैं। गांव की जर्जर पुलियाएं, गंदगी से भरी नालियां और बदहाल व्यवस्थाएं ग्रामीणों की परेशानी का कारण बनी हुई हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से विकास के नाम पर योजनाएं तो आईं, लेकिन धरातल पर उनका लाभ दिखाई नहीं देता। गांव के कई हिस्सों में हालात ऐसे हैं कि लोगों को रोजाना कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। यही कारण है कि अब विकास के दावों की खुली पोल गांव में चर्चा का विषय बन चुकी है।
सबादा ग्राम सभा की तस्वीरें बयां कर रही हैं जमीनी हकीकत
ग्राम सभा सबादा से प्राप्त तस्वीरों में साफ दिखाई दे रहा है कि कई स्थानों पर नालियां कूड़े-कचरे से भरी हुई हैं। पानी की निकासी बाधित होने से गंदा पानी जमा रहता है, जिससे दुर्गंध और बीमारी फैलने का खतरा बना रहता है।
ग्रामीणों का कहना है कि नियमित सफाई नहीं होने के कारण नालियों की स्थिति दिन-प्रतिदिन खराब होती जा रही है। ऐसे में विकास के दावों की खुली पोल स्वयं गांव की गलियां और नालियां खोल रही हैं।
टूटी पुलियाएं बन रही हैं दुर्घटनाओं का कारण
गांव में कई स्थानों पर बनी आरसीसी पुलियाएं जर्जर हो चुकी हैं। कुछ पुलियाओं के किनारे टूट चुके हैं, जबकि कई जगहों पर लोहे का सरिया बाहर निकल आया है। ग्रामीणों के अनुसार इन पुलियाओं की स्थिति लंबे समय से खराब है, लेकिन मरम्मत की दिशा में कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया।
बरसात के मौसम में इन पुलियाओं से गुजरना और अधिक जोखिम भरा हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इनका निर्माण या मरम्मत नहीं कराई गई तो कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
15 वर्षों के विकास पर उठ रहे हैं गंभीर सवाल
ग्रामीणों के अनुसार पिछले लगभग 15 वर्षों से विकास के बड़े-बड़े दावे किए जाते रहे हैं, लेकिन गांव की मूलभूत समस्याएं आज भी जस की तस बनी हुई हैं। लोगों का कहना है कि यदि विकास कार्य सही तरीके से हुए होते तो आज गांव की यह स्थिति नहीं होती।
गांव के जागरूक नागरिक पूछ रहे हैं कि आखिर विकास योजनाओं का लाभ कहां गया? नालियां गंदी क्यों हैं? पुलियाएं टूटी क्यों हैं? यही सवाल आज विकास के दावों की खुली पोल को और मजबूत बना रहे हैं।
स्वच्छता अभियान पर भी उठे सवाल
सरकार द्वारा स्वच्छता अभियान को लेकर लगातार जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाते हैं, लेकिन सबादा ग्राम सभा की तस्वीरें अलग ही कहानी बयान कर रही हैं। कई स्थानों पर गंदगी का अंबार लगा हुआ है और नालियां सफाई की बाट जोह रही हैं।
ग्रामीणों का मानना है कि यदि नियमित निगरानी और सफाई व्यवस्था लागू की जाए तो गांव की स्थिति में बड़ा सुधार हो सकता है।
जनता पूछ रही है जवाब
- नालियों की नियमित सफाई क्यों नहीं हो रही?
- टूटी हुई पुलियाओं की मरम्मत कब होगी?
- विकास योजनाओं का लाभ ग्रामीणों तक क्यों नहीं पहुंचा?
- गांव की बदहाल स्थिति के लिए जिम्मेदार कौन है?
- विकास कार्यों की गुणवत्ता की जांच क्यों नहीं कराई जाती?
ग्रामीणों ने की जांच की मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभागों से मांग की है कि गांव में हुए विकास कार्यों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही टूटी पुलियाओं, गंदी नालियों और अन्य समस्याओं का स्थायी समाधान निकाला जाए।
लोगों का कहना है कि विकास केवल कागजों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसका लाभ गांव की जनता को दिखाई भी देना चाहिए। आज गांव की तस्वीरें स्वयं विकास के दावों की खुली पोल खोल रही हैं।
यूपी की आवाज़ की विशेष टिप्पणी
सबादा ग्राम सभा से सामने आई तस्वीरें केवल गंदगी और टूटे निर्माण कार्यों की कहानी नहीं कहतीं, बल्कि वे उन दावों पर भी सवाल उठाती हैं जो वर्षों से विकास के नाम पर किए जाते रहे हैं। जब नालियां गंदगी से भरी हों, पुलियाएं जर्जर हों और जनता परेशान हो, तब विकास के दावों की खुली पोल खुलना स्वाभाविक है।
अब यह प्रशासन और जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है कि वे इन समस्याओं का संज्ञान लें और ग्रामीणों को राहत दिलाने के लिए प्रभावी कदम उठाएं।
साभार
ग्राम सभा सबादा से जमीनी तस्वीरें एवं जानकारी:
श्री तनवीर जुबैर खान द्वारा प्रेषित
रिपोर्ट
यूपी की आवाज़ हिंदी न्यूज़
संस्थापक एवं लेखक
रियाज़ुद्दीन जहीर खान

